शुक्रवार, 4 मई 2018

कुर्सी की खातिर दौड़ मियाँ*



















अरे कुर्सी की खातिर दौड़ मियाँ
करनी जनता की फिक्र छोड़ मियाँ
गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी, भगाएंगे
नए नए जुमलों का बम फोड़ मियाँ
रस्मों रिवाजों में उलझ गया इंसान
बेमतलब के रस्मों रिवाज तोड़ मियाँ
बारूदी बिसात बिछाए बैठी दुनियाँ
नम्बर वन बनने की मची होड़ मियाँ
सब अपने है रिश्तों में कोई फर्क नही
नही आता हमे गुणा भाग जोड़ मियाँ
बहू के संग संग दहेज भी मांगे जो
ऐसे लालची लोंगों से रिश्ता तोड़ मियाँ
ये जो पड़ोसी रोज आंख दिखाता है
"राज़" एक दिन अच्छे से गर्दन मरोड़ मियाँ

©® *राजीव शर्मा "राज़"*
*लुधियाना*
Rajeev Sharma RAJ

अच्छी आज दोस्ती निभाई तूने


मेरी जग हसाई कराई तूने
अच्छी आज दोस्ती निभाई तूने

जीवन में हमारे भरा अंधेरा
घर अपने दिवाली मनाई तूने

माना था तुझे ही यहाँ पर अपना
फिर क्यूं आग घर में लगाई तूने

जीना चाहता साथ में तेरे मैं
क्यूँ दिल से मुहब्बत मिटाई तूने

आखिर क्यूँ हुआ बेवफा वो दोस्तों
जिस पर "राज़" ये जाँ लुटाई तूने ।

राजीव शर्मा "राज़"
लुधियाना
Rajeev Sharma RAJ

मंगलवार, 1 मार्च 2016

अभी हमे और मन्दिर मस्जिद बनाने है

अभी हमें एक दुसरे के घर ढहाने है
अभी हमे और मन्दिर मस्जिद बनाने है

फुर्सत नही हमें देश के हित में सोचें 
कुर्सी की खातिर और झगड़े कराने है

सियासती चालें चल चल कर अब हमें 
बच्चें कुछ बूढ़े कुछ और इंसान जलाने है

इन गद्दारों का कोई मजहब नही होता है
मासूमों की लाश पर झूठें आसूं बहाने है
©®राजीव शर्मा "राज"
लुधियाना

देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा

देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा
लगता है हमें भी हथियार उठाना होगा

जो सदा आँख मिलाने से भी डरते हैं
वो भारत की बर्बादी की बात करते हैं 
किसमें दम है जो भारत के टुकड़े करे 
अब आखिर कब्र में उनका ठिकाना होगा 
देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा
लगता है हमें भी हथियार उठाना होगा

देश का खाते हो देश से ही जलते हो
देश के ख़िलाफ़ चालें तुम चलते हो
क़साब, जैसे ये आतंकवादी आका तुम्हारे 
तुम्हे भी कसाब के पास पहुंचाना होगा
देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा
लगता है हमें भी हथियार उठाना होगा

हर बार, बार-बार मुँह की खानी पड़ेगी
ये बात तुम्हे कितनी बार बतानी पड़ेगी
हर बार ईंट का जवाब पत्थर से देंगे हम 
तुम्हे तुम्हारी भाषा में ही समझाना होगा 
देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा
लगता है हमें भी हथियार उठाना होगा

आखिर क्यों अपनी अौकात दिखाते हो ?
क्यों तुम चंद सिक्कों में बिक जाते हो ?
आज यहाँ कल वहाँ दंगा करवाते हो 
अब, इस आग में तुम्हे भी जलाना होगा 
देश के गद्दारों को सबक सिखाना होगा
लगता है हमें भी हथियार उठाना होगा
©®राजीव शर्मा "राज"
लुधियाना

ऐ खुदा, तू ही दे बता कोई ऐसी जमीं कोई ऐसी जमीं ......

ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
जहाँ एक दूजे को प्यार सभी करते हो
जहाँ लोग ना कभी भूखें मरते हो 
जहाँ रिश्वतखोरी का नाम ना हो
जहाँ नेता ना अपनी जेबें भरते हों 
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
घर्म का जहाँ ना गन्दा खेल होता हो
बिन माँ का बच्चा ना कोई रोता हो 
जहाँ चैन सकूँ को ओढ़े सब सोते हों
गरीब किसान ना कर्ज़ को ढ़ोते हों 
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
जहाँ शिक्षा का ना कोई व्यापार हो
सरहदों के बीच ना कोई तलवार हो
माँ बहनों की इज़्ज़त सलामत रहें
रिश्तें ना जहाँ होते तार तार हों 
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
साफ़ हर मन का कोना कोना हो
बूढ़ी आँखों को ना मिले रोना हो
कोई बहन दहेज़ की बलि न चढ़े
कोई अनपढ़ ना हो हर कोई पढ़े 
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
देश की खातिर मरना मन मन में हो
जहाँ देशभक्ति हर कण कण में हो
झूठ कपट दिखावे से कोसों दूर हों
इंसान बनकर जीयें ना कोई गरूर हो
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
बेटा बाप से नज़रे ना चुराता हो 
भाई भाई को अकड़ ना दिखाता हो
एक छत के नीचे खुशहाल परिवार हो
जहाँ प्यार, बस प्यार, बस प्यार हो 
ऐ खुदा, तू ही दे बता 
कोई ऐसी जमीं 
कोई ऐसी जमीं ......
©®राजीव शर्मा "राज"
लुधियाना

सोमवार, 28 दिसंबर 2015

घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी

हर दुःख सुख में मेरे साथ है, मेरी बेटी
घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी

नटखट सी, भोली सी, बड़ी प्यारी सी है
मेरी गुड़िया, मेरी बेटी, बड़ी दुलारी सी है
है वो मासूम सी, ज़िद भी बहुत करती है
सच कहूँ ! हसीं की बरसात है, मेरी बेटी
घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी

शरारत के सिवाय कुछ नही करती है
चूहे के अलावा किसी से नही डरती है
घर में उसका अलग ही रौब होता है
कोई डाल डाल, तो पात पात है, मेरी बेटी
घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी

एक से बढ़कर एक ख्वाहिशें हैं उसकी
रोज़ होती नई-नई फरमाइशें हैं उसकी
मैं उसके सवालों से बच नही पाता हूँ
जब कभी भी करती सवालात है, मेरी बेटी
घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी

दुनियाँ में उसको अलग पहचान दिलानी है
बेटियाँ बोझ नही, बात सबको समझानी है
साथ, कदम से कदम मिलाकर चलेगी वो
हमेशा मैं उसके, वो मेरे साथ है, मेरी बेटी
घर में खुशियों की सौगात है, मेरी बेटी 





गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

आजा मेरे ख्वाबों में आ.........

आजा मेरे ख्वाबों में आ
आके फिर से मुझे सता

मैं जो रूठ जाऊं तुझसे
सिर्फ तू ही मुझे मना

झील सी आँखों में डूब जाऊं
मुझे अपनी पलकों में छुपा

भूल जाऊं सारी कायनात को
फिर मुझे ऐसा दीवाना बना

बाहाओं में गिरफ्तार कर ले
उम्र भर कैद की सज़ा दे सुना

लौट आ मेरे आगोश में तू
या "राज़" को अपने पास बुला

ग़मों के दौर तो आते जाते रहेंगें.......

गर हँसने वाले यूँही हँसाते रहेंगे
हम उम्रभर यूँही मुस्कुराते रहेंगें

चाहने वालों की कमी नही है
चाहने वाले तुझे चाहते रहेंगें

ये वादा है सदा हम साथ हैं तेरे
खुदा कसम ये वादा निभाते रहेंगें

सुबह शाम दुआ सलाम होती रहे
इन ख़्वाबों को हम भी सजाते रहेंगें

मामूली ज़ख्मों से ना घबराया कर
ग़मों के दौर तो आते जाते रहेंगें

दुनियाँ की ना परवाह किया कर
देख तेरी बुलंदी वो घबराते रहेंगें

तेरे आँगन में रहे खुशियाँ सदा
ईश्वर के घर दीप जलाते रहेंगें